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भूदान किसानों के भूदान भूमि का वजूद संकट में – अधिवक्ता मुनीश ओम ।

भूदान किसानों के भूदान भूमि का वजूद संकट में – अधिवक्ता मुनीश ओम ।

सुधांशु कुमार सतीश

सिमराही ,सुपौल ।  सुपौल जिला अंतर्गत राघोपुर प्रखंड के सर्वोदय आश्रम, सिमराही बाजार में भूदान किसानों की बैठक बिहार भूदान यज्ञ समिति के पूर्व सदस्य एवं वरिष्ठ समाजसेवी जीवनेश्वर साह के अध्यक्षता में आयोजित की गई ।
बैठक में विशेष रूप से आमंत्रित पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मुनीश ओम प्रकाश सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि, विनोद कुमार झा संयुक्त निदेशक कृ.ग. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग पटना द्वारा दिनांक 24/07/ 2015 को निर्गत अपर समाहर्ता को प्रेषित परिपत्र के कंडिका 3 में निर्देशित परामर्श से लाखो भूदान किसानों का भूदान भूमि का वजूद संकट में आ गया है ।
उक्त परिपत्र बिहार भूदान यज्ञ एक्ट 1954 की धारा 12 का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन है।

उक्त परिपत्र के अनुसार कंडिका 3 में उल्लेखित पृच्छा यथा 3

” यदि किसी भूतपूर्व जमींदार के द्वारा जमींदारी के उन्मूलन के पश्चात गैरमजरूआ खास जमीन बिहार भूदान यज्ञ समिति /आचार्य विनोबा भावे को दान स्वरूप दिया गया तो क्या वैसे दान पत्र की मान्यता दी जाएगी । क्या वैसे दान पत्रों की सक्षम राजस्व पदाधिकारियों के द्वारा सम्पुष्ट किया जाएगा ।”

पृच्छाएँ से संबंधित विधि विभाग द्वारा दिए गए मंतब्य

जमींदारी उन्मूलन के पश्चात यदि किसी भूतपूर्व जमींदारी के द्वारा गैरमजरूआ खास जमीन बिहार भूदान यज्ञ समिति अथवा विनोबा भावे को दान स्वरूप दिया गया है तो ऐसे दान पत्रों की वैधानिक मान्यता नहीं होगी क्योंकि जमीदारी उन्मूलन के पश्चात गैरमजरूआ खास भूमि सरकार में निहित हो चुकी है । जबकि उक्त मंतव्य बिहार भूदान यज्ञ अधिनियम 1954 की धारा 12 के प्रावधानों के अनुकूल नहीं है ।

अधिनियम की धारा 12 में स्पष्ट है कि राज्य में निहित भूमि का भूदान यज्ञ समिति में हस्तांतरण

यदि किसी स्वत्वधारी या भूधृत्वधारी में जिसका इस्टेट या भूधृति बिहार लैंड रिफोर्मर्स एक्ट 1950 बिहार एक्ट 1950 (बिहार एक्ट 30, 1950) के अधीन राज्य में निहित हो चुकी हो, इस अधिनियम के प्रारंभ से पहले लिखित रूप से घोषणा की हो कि ऐसे इस्टेट में समाविष्ट किसी भूमि को उसने श्री आचार्य विनोबा भावे को दान कर दिया है और राज्य सरकार से लिखित प्रतिज्ञा की हो कि इस अधिनियम के अधीन ऐसी भूमि के संबंध में भुगतानी मुआवजा (अंतरिम भुगतान सहित) छोड़ देगा तो राज्य सरकार ऐसी भूमि को भूदान यज्ञ प्रयोजनार्थ भूदान यज्ञ समिति को हस्तांतरित कर देगी और वह भूमि भूदान यज्ञ समिति में निहित हो जाएगी और उसके बाद धारा 10 और 11 धाराओं के उपबंध उस भूमि पर लागू होंगे ।
परंतु या धारा 10 की उप धारा 1 के परन्तुक में परिभाषित किसी प्रकार के भूमि पर लागू नहीं होगी ।
उन्होंने आगे कहा कि इस संबंध में वर्ष 1954 में आर. एस. मिश्रा, आईएएस, एडिशनल सचिव, राजस्व विभाग, बिहार सरकार का पत्रांक 5107-LR/E/VII-1016/54(pt) पटना दिनांक 6 सितंबर 1954 द्वारा प्रेषित सभी समाहर्ताओं में सुस्पष्ट रूप से अधिनियम की धारा 12 के संबंध स्पष्ट निर्देश एवं मंतब्य दिया ।
यह आश्चर्य का विषय है कि उपयुक्त परिपत्र जो 6 अप्रैल 1954 को जारी किया गया के बाद लगभग 60 वर्षों बाद विधि विरुद्ध नया परिपत्र जारी करना राज्य प्रायोजित भूमि विवाद आरंभ करना प्रतीत होता है अन्यथा इतना स्पष्ट वर्ष 1994 में जारी प्रपत्र के बाद नया परिपत्र जारी करने की आवश्यकता ही नहीं है ।
अवश्य ही लाखों विशेषकर दलित, महादलित एवं पिछड़े समुदाय के भूदान किसानों को तंग तबाह व बर्बाद करने की साजिश है ।
अधिवक्ता श्री सिंह ने कहा कि उक्त परिपत्र के कारण लाखों भूदान किसान परेशान है ।
दरभंगा महाराज अथवा हथुआ महाराज, अन्य बड़े बड़े जमींदार द्वारा भूदान में दानित गैरमजरूआ खास (मालिक) भूमि जो भूदान कमिटी द्वारा भूदान किसान को आवंटित कर दी गई है वह राजस्व पदाधिकारियों द्वारा कब बेदखल किए बेदखल कर दिए जाएंगे, उन्हें प्राप्त भूमि का दाखिल खारिज नहीं होगा, ऐसे अनेक प्रश्न उनके सामने खड़े हो गए हैं ।
उपरोक्त प्रकार की समस्याएं विभिन्न जिलों में राजस्व पदाधिकारियों द्वारा खड़ी की जाने लगी है, ऐसे कई ठोस उदाहरण भी सामने आए हैं ।
इस परिपत्र को अविलंब वापस लेने की आवश्यकता है जिससे कि लाखों भूदान किसानों को परेशानी से बचाने, न्यायालय में हजारों लाखों की संख्या में परिवाद दाखिल होने की स्थिति से बचा जा सके ।
इस अवसर पर अध्यक्षीय भाषण देते हुए जीवनेश्वर साह ने कहा कि भूदान किसानों के हित में अविलंब उक्त परिपत्र वापस लिया जाए । साथ ही उक्त परिपत्र जारी करने वाले पदाधिकारी को दंडित किया जाए । यह पत्र राज्य सरकार को बदनाम करने वाला बताया । आगे उन्होंने कहा कि वो दान कमेटी में व्याप्त भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले लंबे समय तक पद पर रहने वाले तत्कालीन अध्यक्ष शुभ मूर्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत बताया । प्रमुख वक्ताओं में लक्ष्मी नारायण मेहता, हरी नारायण मंडल, बाआ लाल राम, गिरधर कामत, ज्ञानदेव बाबू, विष्णु देव मुखिया, सुतहरू शर्मा, कुमार ओम प्रकाश, ललन प्रसाद, ब्रह्मदेव प्रसाद यादव, प्रभु नारायण ठाकुर, कृष्ण देव साह, नारायण साह, सदानंद कामत, तारानंद, डॉ सूर्य नारायण ठाकुर, राम प्रसाद मंडल, मानिक लाल मंडल, दुर्गी नारायण भगत, जगदीश पासवान, महानंद पासवान आदि ने अपने अपने विचार व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से अविलंब उक्त परिपत्र को वापस लेने का मांग किया । नहीं मानने पर व्यापक आंदोलन शुरू करने की बात कही ।
धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर विष्णुदेव मुखिया ने करते हुए भूदान किसानों को एकजुट होने का आह्वान किया ।

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