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एक घाट पर दो देश के श्रद्धालु लोक आस्था का महा पर्व चैती छठ पूजा के अवसर पर कोसी नदी पर उमड़ी भीड़

एक घाट पर दो देश के श्रद्धालु लोक आस्था का महा पर्व चैती छठ पूजा के अवसर पर कोसी नदी पर उमड़ी भीड़
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राजीव कुमार सुपौल

बिहार के सुपौल जिले के सीमावर्ती इलाके में नेपाल भारत सीमा पर हो रहे कोसी नदी पर दो देश के श्रद्धालुओं की भीड़ उमरी है सदियों से साल में दो बार कोसी नदी पर लोक आस्था का महा पर्व चैती छठ के अवसर पर नेपाल और भारत के छठ पूजा करने वालो श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है और नेपाल भारत के सभी प्रशासनिक पदाधिकारी इसमें शामिल होते हैं।
इस वर्ष चैत्र नवरात्र में षष्ठी तिथि का आरंभ 22 मार्च को 1 बजकर 50 पर हो चुका है। लेकिन छठ पर्व 23 मार्च को किया जाएगा। इसकी वजह यह है कि 23 मार्च को सप्तमी तिथि दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से लग रही है। ऐसे में उदया तिथि को लेकर शाम में छठ की पूजा 23 मार्च को होगी और 24 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।

ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि षष्ठी देवी यानी छठी मैय्या ब्रह्माजी की मानस पुत्री हैं जिनका नाम देवसेना है। देवसेना का विवाह भगवान शिव के बड़े पुत्र कुमार कार्तिकेय से हुआ है जिससे यह स्कंद कुमार की पत्नी कहलाती हैं। स्कंद कुमार कार्तिकेय का ही दूसरा नाम है।

षष्ठी तिथि के स्वामी स्कंद कुमार होने के कारण छठ  व्रत को स्कंद षष्ठी भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि छठ का व्रत रखने से स्कंदमाता और कुमार कार्तिकेय की भी प्रसन्नता प्राप्त होती है। कुमार कार्तिकेय के साथ अंक 6 का बहुत ही अद्भुत संयोग है। इनका जन्म षष्ठी तिथि को हुआ था। इनके मुख भी 6 हैं और इनका पालन पोषण 6 कृतिकाओं ने मिलकर किया है जिससे इनकी माताओं की संख्या भी 6 मानी जाती हैं। यही वजह है कि छठ की पूजा से कुमार कार्तिकेय आनंदित होते हैं।

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